9.2.23

S-230 उड़ाता रहा मेरी नींद

उड़ाता रहा मेरी नींद ता-उम्र जो शख्स,
वो आया मुझे जगाने मेरे सो जाने के बाद।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-230

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...