7.2.23

S-225 हुस्न-ओ-जमाल

हुस्नो-ओ-जमाल ही दौलत नहीं होते,
जज़्बातो-ख़्यालात भी हुआ करते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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