दर्द-ए-दिल छुपाए न छुपते कभी,
अगर ये आंसू रंगीन हुआ करते।
बड़ी रुसवाईयाँ हो जाया करतीं,
जहाँ वाले तमाशबीन हुआ करते।
अगर ये आंसू रंगीन हुआ करते।
बड़ी रुसवाईयाँ हो जाया करतीं,
जहाँ वाले तमाशबीन हुआ करते।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-091
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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