12.2.23

Q-092 कितने प्यारे, कितने मासूम

कितने प्यारे, कितने मासूम से बन जाते हैं लोग।
जाने कैसे इतना अच्छा नाटक  कर पाते हैं लोग।
वही चेहरा-मोहरा, और वही कद-काठी, 
फिरभी मगर सर से पांव तक बदल जाते हैं लोग।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-092

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