11.2.23

S-231 क्या करिए अब

क्या करिए अब उन गुज़रे हुए लम्हात की बात,
रक्खे रह गए जब ज़िन्दगी के सब ही तजुर्बात।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-231
  

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