12.2.23

M-048 तोड़ता जा रहा है

तोड़ता जा रहा है समस्त बंधन,
मन बावरा खोजता है जाने किसे।
उलझन भरा है, एकाग्र नहीं मन,
सीमा में भला कैसे कोई बांधे इसे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-048

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