20.2.23

M-049 बस कुछ ही देर

बस कुछ ही देर तो लगती है,
उड़ती पतंग को ज़मीं पर आने में।
फ़ायदा ही क्या ज़्यादा  उड़ने का,
रक्खा क्या है आसमाँ पे मंडराने में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-049

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