सुना है दोस्तों के मुझपे इल्ज़ामात बहुत हैं।
ये भी सुना है मेरे अंदाज़ो-नज़रियात ग़लत हैं।
लगाते हैं कैसी कैसी तोहमतें ये सुर्खरू लोग,
बेशऊर बीमार दिमाग़ों की अजीब फ़ितरत हैं।
ये भी सुना है मेरे अंदाज़ो-नज़रियात ग़लत हैं।
लगाते हैं कैसी कैसी तोहमतें ये सुर्खरू लोग,
बेशऊर बीमार दिमाग़ों की अजीब फ़ितरत हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-094
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