31.10.22

S-184 न तो वक़्त उनका है

न तो वक़्त उनका है न ज़माना  उनका है,
मस्लहत से भरा दिलो-दिमाग़ जिनका है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-184


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