ज़मीन पर तुम इस कदर कींचड़ न उछालो यार,
थोड़ी देर उड़े क्या, आसमान सर पर न उठा लो यार,
ज़मीन की होती है दरकार उड़ने को, गिरने को,
ज़मीन को तुम अपना दुश्मन न बना लो यार।
थोड़ी देर उड़े क्या, आसमान सर पर न उठा लो यार,
ज़मीन की होती है दरकार उड़ने को, गिरने को,
ज़मीन को तुम अपना दुश्मन न बना लो यार।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-079
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