काश हमने कर ली होती कोई ख़ता,
जायज़ तो कहलाती उनकी दी हुई सज़ा।
जायज़ तो कहलाती उनकी दी हुई सज़ा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-114
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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