खुशियां लगने लगती हैं और भी अच्छी मुझको,
गुज़िश्ता ग़मों को जब याद मैं कर लेता हूँ,।
अपने तमाम दर्द लगने लगते हैं कम मुझको,
जज़्बात से अपने जब इत्तिलाफ़ मैं कर लेता हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-058
गुज़िश्ता ग़मों को जब याद मैं कर लेता हूँ,।
अपने तमाम दर्द लगने लगते हैं कम मुझको,
जज़्बात से अपने जब इत्तिलाफ़ मैं कर लेता हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-058
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