बेइंतहा शरीफ़ लोग मुझे अच्छे लगते हैं,
बदनाम जब कभी वो मुझे करने लगते हैं।
बदनाम जब कभी वो मुझे करने लगते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-091
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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