3.2.22

Q-044 अपने ही ग़मों

अपने ही ग़मों के ख़ुमार में हैं,
किसी ख़ुशी से होश में नहीं आएंगे हम।
अंधेरों के बाशिंदे हैं 'अजनबी',
नज़र रौशनी के आगोश में नहीं आएंगे हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-044

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