दरवाज़े पर अब कोई खटखटाहट होती नहीं,
होती भी है तो कोई शक्ल नज़र आती नहीं,
वो तो बहुत चाहता होगा मुझसे मिलना, मगर
उसकी ज़िद शायद अभी इजाज़त देती नहीं।
होती भी है तो कोई शक्ल नज़र आती नहीं,
वो तो बहुत चाहता होगा मुझसे मिलना, मगर
उसकी ज़िद शायद अभी इजाज़त देती नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-046
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