लोगों की बातें सुन कर दिल दहल जाता है,
अल्फ़ाज़ रहते हैं वही, पर लहज़ा बदल जाता है।
अल्फ़ाज़ रहते हैं वही, पर लहज़ा बदल जाता है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-062
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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