12.2.22

M-024 टूट जाता है

टूट जाता है दिल एक ही पल में,
फिर क्यूँ संभाल कर रक्खूँ मैं इसे?
घड़ी घड़ी भागता है उसी के पीछे,
भला कैसे बांध कर रक्खूँ मैं इसे ?

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-024

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