15.2.22

P-063 तीरगी है

तीरगी है मेरे इर्द-गिर्द तो क्या हुआ,
जुगनू भी तो अंधेरों में ही चमकते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-063

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...