ये ज़माना कितनी तेज़ी से बदलता है,
जो था महंगा,आज मुफ़्त में मिलता है,
जितनी जद्दोजहद थी मुकाम पाने में,
'अजनबी' आज उतनी ही सरलता है।
जो था महंगा,आज मुफ़्त में मिलता है,
जितनी जद्दोजहद थी मुकाम पाने में,
'अजनबी' आज उतनी ही सरलता है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-025
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