16.2.22

P-064 तन्हाईयाँ जब

तनहाइयाँ जब आंखों को रुला देती हैं,
तब यादें अतीत को वर्तमान बना देती हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-064

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