25.1.22

S-086 आप 'बाहर' निकले

आप 'बाहर' निकले ही क्यों थे भला, इस 'मौसम' में,
बदलना तो लाज़िम था आपका, बाहर की तेज़ 'हवाओं' में।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-086

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...