26.1.22

P-054 मैं तो अजनबी

मैं तो अजनबी हूँ, लोग तो 'करीबी' से भी बचते हैं,
हो जाए अगर सामना, तो नज़रंदाज़ ही करते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी'  P-054

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...