22.1.22

S-084 आपको हसीन आदत

आपको हसीन आदत है बार-बार आईना निहारने की,
हम इश्क़ में सब्र और आईने जैसी वफ़ादारी कहाँ से लाएं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S- 084


No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...