22.1.22

S-083 मामूली सा ही सही

मामूली सा ही सही मगर मैं एक ख़्याल हूँ,
दिलो-ओ-दिमाग़ में कौंधता एक सवाल हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-083

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...