22.1.22

S-082 इश्क़ जिस्मानी हो या

इश्क़ जिस्मानी हो या रूहानी हो,
टिकता वही है जिसमे रवानी हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-082

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...