तोड़ दिया भरोसा जब,
तो अब कस्में क्या, वादे क्या?
टूट गए रिश्ते बरसों के,
तो अब ताने क्या, तिशने क्या?
तो अब कस्में क्या, वादे क्या?
टूट गए रिश्ते बरसों के,
तो अब ताने क्या, तिशने क्या?
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-038
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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