16.12.21

Q-034 मुझे मालूम है

मुझे मालूम है कि आप बेवफ़ा हो गए,
मगर, ये मैं किसी से कह नहीं सकता।
बाख़ुशी सहन कर लूंगा तमाम रंजो-ग़म,
आप पर कोई हर्फ़, मैं सह नहीं सकता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-040

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...