13.12.21

Q-033 मैं जानता हूँ

मैं जानता हूँ, मैं ख़्वाब देख रहा हूँ,
हसीं धोखा ख़ुदको आज दे रहा हूँ,
मिले न मिले मुस्तक़िल ख़ुशी मुझे,
पल दो पल झूंटी तसल्ली दे रहा हूं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-048



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K-007 सूरज को मैं

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