मैं जानता हूँ, मैं ख़्वाब देख रहा हूँ,
हसीं धोखा ख़ुदको आज दे रहा हूँ,
मिले न मिले मुस्तक़िल ख़ुशी मुझे,
पल दो पल झूंटी तसल्ली दे रहा हूं।
हसीं धोखा ख़ुदको आज दे रहा हूँ,
मिले न मिले मुस्तक़िल ख़ुशी मुझे,
पल दो पल झूंटी तसल्ली दे रहा हूं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-048
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