झूंट ना मुस्कुरा इतना तू "अजनबी",
ये मत भूल तू एक खुली किताब है।
ये ज़माने वाले हैं बहुत तजुर्बेयाफ्ता,
ताड़ लेंगे तू ग़मज़दा है या शादाब है।
ये मत भूल तू एक खुली किताब है।
ये ज़माने वाले हैं बहुत तजुर्बेयाफ्ता,
ताड़ लेंगे तू ग़मज़दा है या शादाब है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-032
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