2.12.21

P-034 बहारें जब भी

बहारें जब भी आती हैं, मेरा पता भूल जाती हैं,
सबको देके कुछ न कुछ, वहीं से लौट जाती हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-034

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