3.12.21

S-062 वक्त उसका

वक्त उसका बड़ा अच्छा गुज़र गया,
क्या हुआ जो कोई तन्हा गुज़र गया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-062

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...