15.11.21

T-008 आप जिसके साथ

आप जिसके साथ बुरा कर रहे हैं, 
ज़रूरी नहीं कि वही आपको सज़ा देगा, कोई और भी दे सकता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-008

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...