27.11.21

S-057 बज रहे होंगे

बज रहे होंगे मेरे ही कान, तेज़ हवाओं के झन्नाटे से,
वरना बुलाएगा भला कौन मुझे इस तन्हाई के सन्नाटे में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-057

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K-007 सूरज को मैं

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