26.11.21

S-056 चराग़ों को बिन

चराग़ों को बिन जलाए बैठे रहे हम इस उम्मीद में,
के आने से आपके वो रौशन हो जाएंगे खुद ब खुद।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-056


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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...