23.11.21

S-049 फूल गुलाब का

फूल गुलाब का क्या मिला, हम जज़्बात में बह गए।
गुलाब तो ख़ैर मुरझा गया, मगर कांटे हाथ मे रह गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-049

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...