8.11.21

S-039 ये दुरुस्त नहीं

ये दुरुस्त नहीं कि लोग बदल गए हैं,
हाँ, उनके नज़रिये, पैमाने बदल गए हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-039

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...