7.11.21

S-038 चल रहा था

चल रहा था सीधे सादे, वो कहीं मुड़ा नहीं, 
रास्ते ही मुड़ गए,  उसकी कोई ख़ता नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-038

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...