19.10.21

T-001 वो दिन कहाँ

वो दिन कहाँ गए, जब गिले दूर करने में घंटों कट जाया करते थे, 

हम-मिज़ाजी हम-ख्याली ने बना दी ज़िन्दगी बद-ज़ायका अब,


कहाँ गए हंसीं इल्ज़ाम उनके, जो हम पर वो लगाया करते थे।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  T-001


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