10.8.21

M-010 न वक्त ठहरा है

न वक्त ठहरा है, न तुम ही ठहरे हो,

बस बेचारी ज़िन्दगी ही ठहर गई है।

खुशी रहा करती थी जिन चेहरों पर,

आज वहां संजीदगी ही ठहर गई है।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-010


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