12.8.21

P-015 ये रोशनी

ये रोशनी खुद ब खुद कहाँ से आ रही है  छनकर?

कहीं तुम तो नहीं आ गए मेरे अंधेरों में  रोशनी बनकर?


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-015

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