15.8.21

M-004 अगर आपकी

अगर आपकी ये आन है,

तो  हमारी भी ये शान है,

भुला देंगे आपको अगर,

आपको कोई अभिमान है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-004


No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...