14.7.21

S- 030 अपने ग़मों को

अपने ग़मों को और न बढ़ा, खुद ग़मों का वाइस बनकर,
जो तू न था "अजनबी" वो ना बन, किसी की ख्वाहिश बनकर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-030

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