13.7.21

M-008 यूं ही नहीं

यूँ ही नहीं आतीं हैं उबासियाँ,

बेसबब नहीं होतीं हैं उदासियाँ, 

दर्द की आवाज़ें आती रहती हैं,

भले छाई रहती हैं ख़ामोशियाँ।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-008


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