13.7.21

Q-017 ये "गुलज़ार" के

ये "गुलज़ार" के अंदाज़ में बातें न किया करो तुम,

सीधे-सादे कहा करो, उलझा न दिया करो तुम,

बारिश,छतरी,मौसम, मरासिम बहुत हो गए अब,

ज़रा कभी असल मुद्दे पर भी आ जाया करो तुम।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  Q-017


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