13.6.21

P-006 आप मे और आपके

आप मे और आपके भगवान में कोई अंतर नहीं,

न आप खुद को धोखा दे सकते हैं न भगवान को।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-006


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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...