9.6.21

S-013 मैं तो पीता हूँ

मैं पीता हूँ ग़मों को, लोगों को मयकशी लगती है,
मुझे मारा है मुहब्बतों ने, लोगों को ख़ुदकशी लगती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-013

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...