9.6.21

S-014 हौंसले देखिए

मंसूबे देखिए मुख़ालिबों के कितना इसरार कर रहे हैं,

फ़नाह हो चुके हैं मगर दफ़्न होने से इनकार कर रहे हैं।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-014


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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...