5.5.21

S-002 अगर आज बेवफ़ा

अगर आज बेवफ़ा हुआ तो गिला कैसा,
वफ़ादार भी तो रहा वो इतने दिन  तक।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-002

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...