मेरे 'अपने' हर हाल में, मेरा हाल जान लेते हैं।
मेरी मुस्कुराहट में भी, मेरा दर्द पहचान लेते हैं।
बात को कितना भी घुमाफिरा कर पेश कर दूँ,
वो ज़हीन जो ठहरे, सही मतलब जान लेते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-003
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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