28.5.21

S- 009 बड़ी दुश्वार

बड़ी दुश्वार हुआ करती हैं कुछ मजबूरियां,

उन्हें छुपाने की भी होती हैं बहुत मजबूरियां।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-009


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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...